50 साल के बाला कृष्णा, जिन्होंने कोरोना वायरस की चपेट में आने के शक में सुसाइड कर लिया. फोटो- रिपोर्टर आशीष पांडे
आंध्र प्रदेश का चित्तूर ज़िला. यहां एक आदमी ने कोरोना वायरस होने की आशंका के चलते सुसाइड कर लिया. घटना 10 फरवरी की है. सुसाइड करने वाले आदमी का नाम के. बालाकृष्णा था. वो 50 साल के थे.
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से उन्हें ज़ुकाम और बुखार था, तो वो डॉक्टर के पास गए. डॉक्टर ने साफ कहा कि उन्हें इन्फेक्शन हुआ है, लेकिन बालाकृष्णा को लगा कि वो कोरोना वायरस के कॉन्टैक्ट में आ गए हैं और इसी वजह से उनकी तबीयत बिगड़ रही है. परिवारवालों का कहना है कि कोरोना के डर से ही बालाकृष्णा ने सुसाइड किया.
क्या है पूरा मामला?
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना चित्तूर के सेशमा नायडू कांड्रिगा गांव की है. पिछले हफ्ते बालाकृष्णा को बुखार आया. इलाज के लिए 5 फरवरी को वो तिरुपति के SVRR गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल गए. डॉक्टर ने कहा कि उन्हें वायरल इन्फेक्शन हुआ है. किसी और को ये इन्फेक्शन न हो, इसलिए उन्हें मास्क पहनकर रहने की सलाह दी.
कुछ दिन तिरुपति में रहने के बाद 9 फरवरी को बालाकृष्णा अपने गांव वापस आ गए. परिवार को बताया कि वो कोरोना वायरस की चपेट में आ गए हैं. कहा कि कोई भी उसके पास न आए. जब परिवारवालों ने समझाने की कोशिश की कि उन्हें कोरोना नहीं है और उनके पास जाने की कोशिश की, तो उन्होंने पत्थर फेंकने शुरू कर दिए.
चित्तूर का वो गांव, जहां ये घटना हुई. फोटो- रिपोर्टर आशीष पांडे
बालाकृष्णा का 22 साल का बेटा बाला मुरली ने बताया कि उसके पिता दिनभर फोन पर कोरोना से जुड़े वीडियो देखते रहते थे. इन्हीं वीडियो के आधार पर कहते थे कि वो भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं. मुरली का कहना है,
‘मेरे पिता कहते रहते थे कि कोरोना वायरस के जो भी लक्षण हैं, वो सब उनमें दिख रहे हैं. उन्होंने हमसे कहा कि वो भी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं. अपने पास आने नहीं देते थे. पास जाने पर पत्थर फेंकने लगते थे.’
10 फरवरी की रात क्या हुआ?
रात के करीब 2.30 बज रहे थे. घर पर सबको सोता देख बालाकृष्णा घर से बाहर चले गए. बाहर से दरवाजा लॉक कर दिया. करीब 3 बजे उनकी पत्नी को महसूस हुआ कि बाला घर पर नहीं हैं और दरवाजा बाहर से बंद है. उन्होंने पड़ोसियों को कॉल करके दरवाजा खुलवाया. सब बाला को खोजने निकल पड़े. देखा कि गांव के बाहरी इलाके में बाला का शव एक पेड़ पर लटका हुआ है. उस जगह पर जहां, उसकी मां को दफनाया गया था.
बालाकृष्णा के बेटे का कहना है कि उन्होंने ये नोटिस किया था कि उनके पिता की दिमागी हालत बिगड़ रही है. इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार के कई टोल फ्री नंबरों पर काउंसलिंग के लिए कॉल भी किया था, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया. बाला मुरली का दावा है कि अगर उन नंबरों में से कोई फोन उठा लेता, तो आज उनके पिता जिंदा होते. इसके अलावा उन्होंने अपील की कि कोरोना को लेकर ज्यादा से ज्यादा जागरूकता लाने की जरूरत है.
